जिंदगी से पहले और मौत के बाद
सब निर्भर करता है कर्म पर ।
जिंंदगी और मौत सिक्के के दो पहलू
जिंंदगी मिली है तो मौत तो निश्चिंत है ।
दुनिया मे आने से पहले
माँ के गर्भ मे ईश्वर से प्रार्थना करते है
बाहर आने के लिए ।
बाहर आकर सांँसरिक मोह माया मे रम जाते है ।
कर्म प्रधान है और अपने भाग्य को
सँवारने मे लग जाते है ।
जिंंदगी और मौत दोनो ही एक प्रकार की संघर्ष है ।
स्वर्ग भी यही है नरक भी यही है ।
जिंंदगी को सुचारू रुप से जीने के जद्दोजहद मे लगे रहते है ।
शास्त्रों के अनुसार मौत भी हमे अपने कर्म के अनुसार मिलता है ।
किसी को मौत सुलभ मिलती है तो किसी को दुलर्भ ,
हमारे कर्म ही हमारी जिंंदगी और मौत का फैसला करता है।
जिंंदगी से पहले और मौत के बाद माया रूपी शरीर पंँचतत्व से है बनता अंँत समय मे उसी मे विलीन हो जाता है ।
आत्मा अजर अमर है वो दूसरा शरीर धारण कर लेता है।
शिल्पा मोदी✍️✍️

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