ठहर कुछ क्षण को बता दे, है कहां उल्लास तेरा।।
क्यों निरंतर कर्मरत है, प्राण पण अर्पण किए है,
शून्य है सब त्रास तेरा, वृथा है हर अश्रु तेरा।।
बावले मन कुछ बता दे, है कहां गंतव्य तेरा।
तम हृदय की पुस्तकें हैं, श्याम की कर लेखनी है,
पूर्ण है हर शब्द तेरा, है अधूरा ग्रंथ तेरा।
बावले मन कुछ बता दे, है कहां गंतव्य तेरा।
सरल सुचि जल उर्मि तू है, बह रही अविराम तू है,
मौन है आरोह तेरा, कठिन है अवरोह तेरा।
बावले मन कुछ बता दे, है कहां गंतव्य तेरा।
सौम्य कलिका सा सुगम है, दृढ़ कभी चट्टान सा है,
शांत निर्जन वन कभी तू, युद्ध अन्तर्द्वंद भी तू,
सत्य क्या है रूप तेरा, आदि है न अंत तेरा।
बावले मन कुछ बता दे, है कहां गंतव्य तेरा।
ठहर कुछ क्षण को बता दे, है कहां उल्लास तेरा।।
चिर अधूरा किन्तु पूरा, सत्य में यह ग्रंथ तेरा।
बावले मन चल चला चल, है जहां उल्लास तेरा।।।
.......✍️❤️❤️🌅🙏 ऋतु बाजपेई

0 टिप्पणियाँ