सैया करूँ मनुहार। 
पडूँ मैं में तोरी पईयाँ।
पहना दे एक मुदरी।
चलूँ मैं तेरी छईयाँ।

ना पड़ गौरी पईयाँ।
जब तक ना बोले मईयाँ। 
कैसे कर लूँ सगाई। 
जब तक ना करें माँ से मिलाई।

चल आज ही मुझको। 
ले चल पकड़ मेरी तू बईयाँ।
आज ही जान जाऊँ। ।
तूझे सजन बनाऊँ या भईया ।

ना बोल तु ऐसे बोल। 
ओ मेरी नखरिली सजनियाँ।
आज ही पहनाऊँ ।
तुझे प्यार की मुदरियाँ।

अब तक ना था प्यार का मोल।
जब तक थी सीधी गइयाँ। 
अब मैं ना मानूंगी। 
चाहे बन जइयो बैजरूँ गवइयाँ।

अब तुम ना रूठो। 
मान भी जाओ ओ मेरी चंदनियाँ।
चाँदनी रात में। 
चाँद की अंगूठी पहने मेरी दुल्हनियाँ।

नीलम गुप्ता🌹🌹( नजरिया )🌹🌹
                दिल्ली