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ये चंचल सा दिल क्यों भर आता है
इसके भर जाने से, आंखों में पानी क्यों आता है
रोकना चाहते हैं छलकते आंसुओं को
यह तो आंसुओं का सैलाब है,रुक नहीं पाता है
शिकायत तो नहीं है,जिंदगी तुझसे
तेरे आंचल की छांव मे, सुकून भी तो पाया है
कर्जदार है,तेरी रहमत के हम
जिंदगी, तेरी ठोकर ने भी हमको
सही रास्ता दिखाया है,
तेरी आंचल की छांव में रहकर
मैंने अपना,भाग्य जगाया है
हर मोड़ पर, अनुभव नया पाया है
यह तेरा,उपकार है मुझ पर
यह अनुभव, मैंने तुझसे ही तो पाया है
जिंदगी तेरे आंचल की छांव में
सुकून जी भर के पाया है
संगीता वर्मा✍✍

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