तितलियों की तरह उड़ने वाली ।
हवा में लताओं सी झूमने वाली। 
चहेरे पर सुरज सी चमक रखने वाली। 
अपने सपनो में जीने वाली। 
कौन है वो भला ।
जिसकी अदा।
जिसका जुनून। 
जिसका खुमार। 
जिसकी महक।
जिसकी चहक।
जिसकी झनक।
जिसकी सनक।
जिसकी लहर।
जिसकी सहर।
फैली थी जब वह आई थी। 
बेटी बन मेंरे घर आँगन ।
जब आज वह विदा हो गई। 
सब कुछ सूना सूना हो गया। 
मेरी जिंदगी। 
मेरी बंदगी। 
मेरी सरिता।
मेरी कविता। 
मेरा आँगन। 
मेरी आँखे। 
मेरी बांहे। 
मेरा आँचल। 
मेरा काजल।
जिनको अपनी हँसी से ।
खिलखिला कर रखती थी।
जहाँ जहाँ कदम रखती।
वहाँ वहाँ चाँदनी छा जाती थी।

नीलम गुप्ता 🌹🌹(नजरिया)🌹🌹
              दिल्ली