काश! कहने की सारी बातें ,सच हुआ करतीं
और मेरी हर सांस ,कह देने से, तेरी हुआ करती
कमी जब भी ,तेरी उम्र के पन्नों में हुआ करती
मेरी उम्र की कलम ,तेरी किताब सजाया करती
  
काश! कहने की सारी बातें, सच हुआ करतीं।

आज न कोई अल्फ़ाज़ हैं ,न तुझ से कोई माफ़ी
क्या रूठना क्या मनाना, काश मैं बयां कर पाती 
मैं बस खुद को ,बस खुद को माफ कर पाती

काश! कहने की सारी बातें सच ,हुआ करतीं।

बेखबर हर दर्द से ,मैं खिलखिलाया करती
काश वही बेफिक्र ,मैं बचपन सी हुआ करती
टूटे खिलौनों से भी ,नया खेल जोड़ा करती

काश! कहने की सारी बातें सच हुआ करतीं।

काश की हुई हर दुआ ,सच हुआ करती
तेरी आंख न रोती, तू भी मुस्कुराया करती
मेरी कलम भी,आंसुओं से पन्ने न लिखती

काश! कहने की सारी बातें, सच हुआ करतीं।

सिर्फ कहने की नहीं, तुझसे दिल से है दोस्ती
दिल सलामत है जब तक, सलामत है दोस्ती
क्या खुशी क्या दर्द तेरी हर बात से है दोस्ती 

काश !कहने की सारी बातें सच हुआ करतीं।

✍️... ऋतु बाजपेई🙏🌄