हर रोज की तरह ही आज का दिन था। कुछ खास नहीं था फिर भी कुछ तो था जो रोज से अलग था।
शायद आज कि रात वही थी जिसका इंतजार हर कोई बहुत शिद्दत से करता है 
मधु फिर से उन्हीं यादों में खो गई । छोटे से गांव की मधु 
हर काम में निपुण थी ,माता पिता की मर्जी से मधुकर से विवाह हुआ ।दोनों का पहला नाम एक ही था तो सब खूब मजे लेते थे कि कोन किसको बुलाएगा बुलाएगा पता केसे  चलेगा ।पुरानी बातें ,सखियों की बाते याद कर मधु एकाएक मुस्कुराने लगी ।
फिर अचानक ही उदास हो गई .... मन ही मन अपने आप को मजबूत करने लगी । उसे अपने ससुर को दवाई जो देनी थी , दवाई और गरम पानी दे कर अपने कमरे में आते ही फिर मधुकर की यादों में खो गई ,
शादी के तीन दिन महमानो,रस्मो रिवाजो में निकल गया 
फिर उनके मिलन की वो रात आइ जो दो अलग अलग लोगो को एक दूसरे से बांधता है उनकी पूरी शख्सियत उस एक पल से बदल जाती हैं । उन दोनों  ने भी अपनी आने वाली जिंदगी को लेकर बहुत सुंदर सपने देखे और एक दूसरे के लिए लाइफ टाइम ईमानदार रहने की कसम खाई ।
मगर जो हम सोचते हैं वहीं हो ऐसा जरूरी नहीं ,मधुकर को उसकी देश सेवा के लिए बुला लिया गया एक फौजी को हमेशा इसके लिए तैयार रहना पड़ता है मधुकर भी दूसरे दिन अपना फर्ज नीभाने ,अपनी पोस्टिंग पर चला गया ।पीछे छोड़ गया अपनी नई नवेली दुल्हन ,बुजुर्ग पिता और अपनी बहुत सारी यादें ।मधु का मधुकर फिर कभी वापस नहीं आया पर वो मधु का गुरूर था ।उसकी यादें थी ।जो मधु के जीने का सहारा थी ।
मेरी कहानी तुम्हारा फसाना 
साथ मेरा तेरा सदियों पुराना 
दूर तुम चले गए ,तो क्या हुआ 
   हर सांस में रहोगे ,बीत जाए चाहे जमाना ।।







                    रेणू सिंह