खौफजदा है यह जग सारा
प्रकृति का ये कैसा नजारा
एक तरफ महामारी का साया
दूजा अब ये "ताऊते"का पारा
भय की वजह केवल मौत नहीं
बेबस है सब किसी को होश नहीं
प्रलय मचा है ये कोई खेल नही
दुख का अब पारावार नही
सकल सृष्टि में विपदा मची
क्या विनाश की यह लीला रची
अज्ञानी हम है नही कोई राह बची
वो ही बचाएँ जिसने यह रेखा खिंची
हे दयानिधान ओर पालनहार
ये कैसी हो रही हाहाकार
बीच भंवर में कश्ती हमार
अब तो आओ है करूणाकार
अब तो आओ है केशव
लाज बचाओ है केशव
त्राही त्राही करते केशव
आप उबारो है केशव
कृष्णा की ✍️कलम से

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