हे शारदे माँ ,कमल पर विराजित 
करू वंदना कर जोर तेरी 
नमन कोटि कोटि ,वरद हस्त रख दे 
मेरी लेखनी को भावो से भर दे 
धवल रूप मे माँ आकर विराजो 
संगीत मे सात स्वर तुम सजा दो ।
वाणी की देवी ,भावो की जननी 
ह्मदय मे विराजो ,नवल गीत रच दो 
वागेश्वरी माँ, बुद्धि प्रदायिनी 
विचारो मे आओ ,सुसंस्कृत कर दो 
मेरी लेखनी को वरदान दो माँ 
भावो की सरिता मन मे बसा दो 
करू वंदना माँ ,कर जोर तेरी 
ऐसा धवल मनन माँ करा दो ।
विधा की देवी वरद हस्त रख दो 
वाणी मे ऐसा मधुर रस भर दो ।
वाण्येका अलंकारो से हो सुशोभित 
हे वागेश्वरी ,ऐसी सुसंस्कृति भर दो ।
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               मीनाक्षी शर्मा