पग-पग चलू मैं, संग -संग तेरे
वचने निभाना है,जो लिए सात फेरे ।।

तुम बिन क्या मैं ,दिया बिन बाती
जीवन में जो हो तुम,मेरे जीवन साथी ।।

पल-पल जीती मैं,होते तुम पास मेरे
हर कदम तुम चले, हो साथ मेरे  ।।

हर परिस्थिति में, हम-तुम ढल जाते
लबों पे मुस्कान जो,आंखों में आंसू भी छलकते ।।

सुख -दुख में पल,एक से ही गुजरते
प्यार की डोर से,जैसे-जैसे हम संवरते ।।

हाथ थामे  चलो, तुम संग-संग मेरे
अटूट "परिणय बंधन" है,जीना मरना अब संग तेरे।।

              ❤️ मनीषा महेंद्र ठाकुर ❤️
                            कर्नाटक