जीयो और जीने दो
ना रोको ना टोको
मुझे मेरी गति मे चलने दो
मेरी प्रेरणा बन सको तो बन जाओ
वरना मेरे पथ पर रोड़े न अटकाओ
जीयो और जीने दो
अभी तो घर की देहरी से पैर निकाला है
असल स्वतंँत्रता क्या होती है अभी तो जाना है
उन्मुक्ता की उड़ान भरना प्रारंँभ किया है
रचुँ किस्मत को सुनहरे कलम से
ऐसा खवाब सजाया है।
जीयो और जीने दो
ना डालो पांँबदिया ,तोड़ सारे समाज की बेडिय़ा
मुझे नया इतिहास रचने दो
ना दो कोई रिश्तों का वास्ता
मै जीना चाहती हुँ अपनी विद्वता से
मुझे उन्मुक्ता से जीने दो
शिल्पा मोदी✍️✍️

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