भीगे भीगे से हैं लम्हें तेरे जाने के बाद
टुकड़े टुकड़े हैं ख्वाब तेरे जाने के बाद,
अब सारी रातें हो गयीं वीरान दिन हो गए बीहड़,
तूने एकबार भी मुड़कर न देखा जाने के बाद।
अब कोई करार कोई सकून नहीं,
जिन्दगी जीने का कोई जुनून नही,
तुम गए हो उस जहाँ में हमे छोड़कर,
न मिल सकोगे किसी जमाने के बाद।
बहुत खुश थी वो तुम्हें पाकर
जिन्दगी चलती थी बड़ी इतराकर,
सब दर्द की लहरों में रेत सा बिखर गया,
कभी न सूखेंगे यह आँसू एकबार मुस्कुराने के बाद।।
अंजू दीक्षित
बदायूँ, उत्तर प्रदेश।

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