8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस अगली कड़ी में हम बात करेंगे  महारानी कुंती की

जी हां कहने को तो महारानी कुंती किंतु समय और भाग्य की ऐसी मार के जिसे महारानी बनना था उसने सारा जीवन वन में काटा।
उसके पांचों पुत्र जो पूरे संसार को जीतने में समर्थ थे फिर भी वन में रहने को मजबूर हुए।

कुंती के पूरे जीवन को यदि मैं अपने नजर से देखूं तो उनके जैसे दूसरी मां मुझे कोई और नहीं दिखाई पड़ती। जिन्होंने जीवन में इतने कष्ट सहे और उसके बाद भी अपने पुत्रों को उन्होंने अच्छे संस्कार सिखाएं।कुंती ने जिस धैर्य का परिचय दिया है, के कष्ट सहकर भी उन्होंने अपने परिवार के लिए कभी अपने पुत्रों के मन में कोई जहर नहीं घोला जहां तक हो सके हमेशा सब में प्रेम बनाए रखने की कोशिश की और  वे कृष्ण भगवान को हमेशा कहती थी कि- "हे प्रभु मुझे दुख दो, कष्ट दो ताकि मैं एक क्षण के लिए भी आपको ना भूल पाऊं"।

वर्तमान समय में जहां छोटी-छोटी बातों पर जो परिवार में झगड़े होते हैं तो सबसे पहले माताएं अपने बच्चों को कहती हैं इनसे बात मत करना यह ऐसे हैं वैसे हैं। हमें कुंती के जीवन से यही सीख लेनी चाहिए कि परिवार के अन्य लोग चाहे कितने भी बुरे हो परिस्थितियां कितनी विपरीत हो कभी अपने बच्चों को किसी के प्रति द्वेष भावना से नहीं भरना चाहिए।

शत शत नमन महारानी कुंती को
# अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं


          वंदना शर्मा🙏