सुबह औ शाम तेरा नाम लेगे।
कि कैसे सब्र से अब काम लेंगे।
तुम्ही कह दो भुलाएं किस तरह हम
दीवानें कब भला आराम लेंगे।
तुम्हारी याद जब आएगी हमदम
तड़प कर हम जिगर को थाम लेंगे।
हुए बरबाद जिसकी जुस्तजू में
यक़ीनन हम उन्हीं का नाम लेंगे।
नहीं अब बेवफा तुझको कहेंगे।
कि अपने सर सभी इल्ज़ाम लेंगे।
तुम्हे हक है भुलाने का भुला दो।
सनम हम तो तुम्हारा नाम लेंगे।
कभी ठोकर ना लगने देंगे तुझको
कसम से बढ़ के तुझको थाम लेंगे।
#मणि बेन द्विवेदी
वाराणसी उत्तर प्रदेश

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