याद कर तुझको आज भी
आँखे नम होती हैं
याद में तेरी,मेरी पलकों को
आज भी भिगोती हैं
जब याद आते हैं वो
प्यार भरे मीठे पल
दिल भर आता है
आँखे बंद होती हैं
सीने में दबे अहसासों का
कतरा- कतरा बाहर आ जाता है
बहते हुए अश्कों को
फिर धीरे से छुपाना पड़ता है
रो रहा हो दिल चाहे
पर मुस्कुराना पड़ता है
किया है तुमसे सच्चा इश्क
इसे ऐसे ही निभाना पड़ता है।।
आशा झा 'सखी'

0 टिप्पणियाँ