मैं तुमसे रूठी हूं मुझे मनाने आओ ,
बस मेरे पास आओ चाहे किसी बहाने आओ।
देखो मेरी काजल से सजी पलके अश्कों से भीगी है ,
रुके हैं कितने दर्द इनमें इन अश्कों को लगाकर गले ,
बहाने आओ।
तुमको मालूम है बहुत नाजुक सा दिल है मेरा ,
और यह बेरुख होना मुझे काफिर लगता है हो ना तेरा,
मेरे इस दिल को समझाने आओ।
बहुत बदमिजाज है आलम दिल का,
नामोनिशान नहीं दूर दूर तक सुकून का,
मेरा खोया हुआ करार लौटने आओ।
सो गए हैं सारे जज्बे तुमसे बिछड़कर,
रह गयीं हैं ख्वाहिशें मसला बनकर,
इस उलझे से मामलात को सुलझाने आओ।
मैं बहुत थक गयीं तुम्हारा घर सम्हालकर,
मैं जिम्मेदारी से मुँह नही मोड़ती किसी बात पर,
पर फिर से एकबार मै तेरे साथ हूँ पगली यह बताने आओ।
कभी कभी जता देना चुप रहने से ज्यादा बेहतर होता है,
कभी कभी मासूम दिल को सुनना ज्यादा पसंद होता है,
हो गए हैं बहुत दिन वो बात दोहराने आओ।
हर वैध हर दवा नाकाम है करार देने में,
हर कोशिश बेकार है आँखों को नींद देने मे,
मेरे मशीहा मुझे देखे मोहब्बतों की थपकी सुलाने आओ।
अंजू दीक्षित,
बदायूँ, उत्तर प्रदेश।

5 टिप्पणियाँ
बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति 🙏