चेहरे-मोहरे से बहुत कुछ मेरे जैसी,
एक की आवाज एक की शक्ल मेरे जैसी
परवाह बड़ी उनकी प्रीत बड़ी,
वो रखती अंदाज थोड़े अलग सी,
कुछ कुछ पिता सी,
सहनशील ,त्यागमयी
कुछ कुछ मां सी,
संघर्ष मयी, ममतामयी
हा शलीका मां का थोड़ा ज्यादा आया
मां की तरह जीना ज्यादा आया,
उनके रहने सहनें के ढंग अलग,
उनकी खासियत सबसे अलग,
पिता सी इसलिए की
वो जीवट, है दोनो
वो जीवंत है दोनो
वो संस्कार से तो दोनों जैसी
विरासत में कलाकार जैसी
स्वाभिमान और सम्मान की वो है भूखी
इसलिए अपमान सहकर
होती रुठी रुठी
मेरी बहनें सहती ज्यादा पर कम सुनाती
सबके हिस्से के वो दोनों
दुख सहती
वो आदर्श कायम कर समाज के बीच रहती
तुम मेरी परछाई वैसी हो
मां के बाद मेरी मां जैसी हो
मेरी बहनों को समर्पित
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मीनाक्षी कुमावत'मीरा'
रोहिड़ा,माउन्ट आबू राजस्थान

9 टिप्पणियाँ
परमानन्द(प्रतिलिपि)