सपनों की दुनिया में एक सपना ऐसा
जो हो हूबहू मेरे ईश्वर जैसा
जो भी चाहूं मुझे मिल जाए
हर इच्छा मेरी पूरी हो जाए।

मिल जाए मुझे नीलगग्न तले एक गांव
जहां खुशी की धूप हो और सुकून की छांव
जहां बहती हो सुख चैन की गंगा
हो ऐसी चादर जो ढके सर को तो ना रहे पांव नंगा।

शीतलता की चांदनी बिखरी हो हर ओर
जुगनू बन तारे टिमटिमाते हों पुरजोर
सबके चेहरे खिलते हों जैसे खिले गुलाब
ना पांव में लगे कांटा ना दिल पे कोई घाव।

हर दिल में बसे सिर्फ प्यार ही प्यार
कोई गैर ना हो न करे कोई किसी पे वार
पर क्या होगा ऐसा किसी रोज़
यहीं सोचते टूटा मेरा सपना।

मैं ये सोच सोच मुसकाया 
कि सुबह सुबह ये सपना आया
सुना सुबह के सपने सच होते हैं
हम जो चाहते हैं ये वहीं होते हैं।।



आभार - नवीन पहल