सपनों की दुनिया है बहुत ही निराली,
महके है इसमें मन की डाली,

हर तरफ है खुशियों का डेरा,
जी करता न हो कभी सबेरा,आपको भी
हम बन्द करके नयन करते रहें बातें प्यारी।

हर एक पल है यहाँ खूबसूरत,
हो  जाती हैं यहां चाहत मुकम्मल,
बहुत मनभावन यह दुनिया ख्याली।

जो बिछड़े हैं वो भी मिल जाते हैं,
बनके आईना पल ठहर जाते हैं,
कह देते हैं सब उनसे मिलकर जो बात हकीकत में छुपाली।

न जमाने का कोई डर है,
न जात पात का कोई बहम है,
बारह मास यहाँ होली दिवाली।

न सपनों के जज्बों पर कोई पहरा,
बस मन के भावों से है राज गहरा,
कभी जानकर कीबन्द आँखे टूटने से अपने ख्वाबों की कलियां बचाली।

कभी सपने टूटे नयन हुए सजल,
कल आएगा एक हंसीन पल,
यह कहकर हमने दिल की दुनिया सँभाली।

मेरे सपनों में कोई न चूर कर दे,
न कोई मुझे पलक भिगाने को मजबूर कर दे,
लगता है डर यह सपनों की दुनिया है हमने बड़े नाजों से पाली।

यों ही महकती रहे मेरे सपनों की बगिया,
सलामत रहे मेरी उम्मीदों का दिया,
सदा मुस्कुराता रहे मेरी बगिया का  माली।

                      अंजू दीक्षित
                  बदायूँ, उत्तर प्रदेश।