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बहुत कोशिश की लड़ने की विपरीत परिस्थितियों से।
पर हिम्मत नहीं हारी कभी
दर्द को बेशक झेला पर उफ्फ नहीं किया।
ग़म से रिश्ता।निभाया पर समझौता नहीं किया।
क्यूंकि जीवन एक संग्राम है, चुनौती है,
और हंस कर स्वीकार किया।
कभी छलकने नहीं दिया आसुंवों के उन कतरों को,
असंख्य बेड़ियों को काटने का जज़्बा जो कायम था।
बेशक ठोकरें लगी, धक्के खाए,उपहास हुआ पर धीरे ही सही चलती रही कामयाबी की राह।
ना तूफ़ान का डर ना चिंता सर्द रातों की।
ना तपती धूप ने विचलित किया
ना शीतलहरी ने।
जज़्बा है कुछ कर गुजरने का।
इतिहास के पन्नों पर सुनहरा नाम दर्ज़ करने का।
लहराऊंगी मैं भी परचम अपने वजूद का,
हासिल करूंगी कामयाबी अपने हिस्से का।
यूं ही निखार नहीं आता हुनर में।
ख़ुद को सूरज की तरह जलाया है।
कठिन राहों से घबराई नहीं कभी।
हिम्मत से अपना कर्तव्य निभाया है।
और ना ही पीछे मुड़ कर देखी कभी।
कहते हैं यूं ही हासिल मुकाम नहीं होती।
#कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती।
कभी हिम्मत नहीं हारी खुद पे ऐतबार रखा।
सोच विस्तृत और इरादा दमदार रखा।
सच आसानी से कब हासिल होती है मंजिल किसी को।
विपरीत परिस्थितियों में खुद को तैयार रखी।
ऐसा नहीं कि गिरे नहीं, ठोकरें भी खाई।
हर बार उठी संभली फ़िर चली।
खार भी राहों में मिला शूल और कांटे भी मिले।
उपहास और आलोचनाएं भी झेली।
पर टूटे नहीं बिखरी भी नहीं।
अपनों का तिरस्कार और अपमान भी मिला।
पर नहीं गौर किया ना पलट कर देखी।
गिरती उठ कर संभलती और फिर चलती।
कोशिश का दामन थामे बढ़ती रही दूर छितिज से दूर जहां उम्मीद का मंजिल झिलमिला रहा था।
ना शिकायत की जमाने से ना
तक़दीर बनाने वाले से।
भरोसा था निज कर्मों पर।
बस बढ़ती रहीं ऊंची नीची पगडंडियों पर।
ढाल लिया खुद को वक्त की पाबंदियों पर।
पूछेगा एक दिन दर्द आ कर मुझसे
चल बता दे कामयाबी की राज अपनी।
क्यूंकि कोशिशें ही कामयाब होती है।
#कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती!!
**मणि बेन द्विवेदी
वाराणसी उत्तर प्रदेश

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