सुनने में आया है कि वो हम से जलते है।
चलो इसी बहाने हमें याद तो किया करते है।

हम तो दिल बड़ा लिये ही घूमते रहते है।
वो है बदनाम करने के बहाने ढूंढते रहते है।

कोई जीये या मरे, उनको कोई फर्क नही।
हद तो ये है कि हरदम वो सताते रहते  है।

शरीफ है हम, शराफत का चोला न पहना।
बात हमारी है कड़क वो हमसे कतराते है।

माँ-बाप है हमारे, हक़ है चाहे डांटे या मारे।
फिर भी ये बात है हम में कि यहीं आते है।

हम कोई गैर नही मगर कोई अपना भी नही।
कोई दो बात कर ले तो दिल बहल जाते है।

पाना हो किसीं को तो आवाज़ दो ज़ोर से।
देखा तो नहीं कि कभी पत्थर पिघल जाते है।



               फिरोज दहिवाला