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हारे हम तो दिल हारे,तुमपे- तुमपे 
कशिश है, तुमसे मिलने की अब
जब से हर पल,ख्वाबों में आते तुम
चहेरे पे हया बनी मुस्कान 
दिल तो बेसुध हुआ जाए 
बोलू कुछ मैं सोंचू कुछ
इस बावरे मन को समझाऊं कैसे 
सनम के आने की आहट पाकर 
खूबसूरत  श्रृंगार करू मैं 
जब तुम आओगे 
ढलते सांझ के साथ 
दीपक की लौ करेगी 
मुझ तक पहुंचने का इशारा 
मेरी इक मुराद है 
जिसे सिर्फ तुम पूरी करना 
इस हृदय मे प्यार और 
अनंत प्यार भरना तुम
या छुपा लेना दिल में 
बस अपना बनाकर 
सच में, बहुत बेसब्र हूं 
तुमसे मिलने को अब ।




               राजेश्वरी ठाकुर