सोनिया को होली खेलना हुड़दंग करना बिल्कुल भी नहीं भाता था, घर के सभी छोटे बड़े खूब मस्ती करते और वो  रूम में बैठकर टीवी देखती ।
भाई की शादी हुई तो भाभी नहीं जानती थी तो गुलाल लगा दिया बस चिढ़ गयी  भाभी मुझे नही पसन्द आइन्दा नही लगाना ,बड़बड़ाती अन्दर चली गयी  किसने बनाया यह सब पागलों की तरह कपड़े रंगों दूसरों को भी भिगाओ खुदको भी।
Sorry दीदी हमें पता नही था  कि आपको पसन्द नहीं, तभी माँ बोल पड़ी अजब ही है यह लड़की पता चलेगा अगले साल ससुराल जाकर दो देवर हैं क्या सुनेंगे इसकी ऐसा भूत बनायेगे इसे ।
हां मै सबको बोल दुंगी मुझे नही भाता यह सब बोलते तो बोल गयी फिर शरमाकर भाग गई ।
मन ही मन एक प्रश्न उठा क्या सच में वहाँ मेरी बात कोई न सुनेगा क्या मायके की दहलीज पर ही छूट जाएंगे सारे मान मनुहार और पलकें भीग गयीं तभी फिर दिल को समझाया कोई न सुने पर आप तो सुनोगे न  पर आप तो बहुत तेज हो वो जब दीदी आयीं थी तो चुपके से कह गयीं थी, मेरा भाई बहुत शख्त है एकदम आजके युग में श्रवणकुमार,  लगता तो हमें भी हैं बरना आज के इस मॉर्डन जमाने में शादी तय होते ही लोग  फोन पर बतियातें हैं खुद भईया भी तो करते थे भाभी से लेट रात तक बात ,और एक यह बन्दा अगूंठी भी ऐसे पहनाई  जैसे एहसान किया हमपर इतनी अच्छे खासे सुन्दर चेहरे को  एक स्माइल दे देते तो क्या बिगड़ जाता खड़ूस कहीं के ।
अगले महीने शादी है अभी कितना काम पड़ा है बहू कल तुम दोनों नन्द भाभी  रमन के साथ बाजार चली जाना साड़ियां दिलवा लाना तैयार होने में वख्त लगेगा ,
जी मम्मी आप बोल देना इन्हें, 
हां कह दुंगी और अपने लिए भी ले आना जो भी चाहिए बड़े प्यार से बहु के सिर पर हाथ फेरा,
दूर खड़ी सोनिया सोच रही थी क्या मेरी सास भी मुझे ऐसे ही प्यार करेंगी , शायद यह मेरे व्यवहार पर निर्भर करता है।
पर वो न समझी तो अपने बेटे की तरह हुई तो क्या हर वक्त उल्टा पुलटा सोचती रहती है।
हे भगवान बाजार में तो बहुत भीड़ है भाभी मैं नही जा सकती भाई से बोलो कल आते हैं।
दीदी अब तो रोज भीड़ होगी शादियों के मौसम आ गए हैं चलिए भी   थोड़ी हिम्मत रखा करो आप इत्ती जल्दी घबरा जाती हो, 
अरे क्या हुआ कुछ न वो दीदी भीड़ देखकर घबरा गयी यह कहते हुए सपना हँस दी पता नही क्या होगा ससुराल में बन्नो रानी का ।
पूरा दिन भागम भाग में वो इत्ती तक गयी आते ही एक कॉफी पीकर दो गयी माँ से बोली मैं खाना नही खाऊँगी मुझे न जगाना।
हे भगवान इसका क्या होगा फूलों से भी नाजुक हैं यह तो कहकर पापा 
मुस्कुरा उठे।
सब आपकी  गलती है और चढ़ाओ सिर धूप में न निकलो काली हो जाएगी, काम न करवाओ पढ़ने दो, अकेले नही जाने दो अब जाना साथ इसके, आए कोई शिकायत आपको तो कोई न कहेगा कुछ सब यही कहेंगे माँ ने कुछ सलीका न सिखाया।
कुछ न होगा सब अक्ल आ जाएगी मायके में भी वेपरवाह न होगी फिर कहाँ होगी और रह गए 10 दिन फिर तो हो जाएगी परायी मेरी लाली कहते कहते रो पड़े  सोनिया के पापा माँ भी सिसक गयी पता ही चला कब 20 साल की हो गयी लगता है जैसे कल की ही बात है जब फ्रॉक और पायल पहनकर सारे घर में चहकती थी  , कैसे विदा कर पाएंगे उसे हम रमन के पापा  करना तो होगा जग को रीत है सबने निभाई हम भी निभाएंगे ।
सुबह सुबह क्यों शोर कर रही सोनिया क्या हुआ माँ ने पास आकर पूछा,
मां मैं नही पहन पाऊँगी इतनी भारी साड़ी  मेरा तो दम घुटता है ।
पागल लड़कीं है बहु तुम ही समझाओ इसे मुझमे दम नही इससे दिमाग मारने की।
अरे दीदी कुछ साड़ी भारी भी होनी चाहिए फिर कौन सा आप काम करोगी सजी बैठी रहोगी गुड़िया सी और न चला जाए तो जीजू गोद उठा लेंगे  आप भी भाभी मजाक करती हो भाई उठाए आपको गोदी ,
हां ,
अरे जल्दी काम मे लगो बातें बन्द करो कहता रमन अंदर आ गया,
कभी हल्दी, मेंहदी, कभी गीत सब खूब धूम से हुआ   जयमाला फिर फेरे और आ गयी घड़ी विदाई की न चाहकर भी कर दी बाबुल माँ ने लाड़ो पराई, रोते सिसकता सबको छोड़ वो चल दी ससुराल गली सारे रास्ते रोती रही  फिर खुदही रोने की आवाज सिसकी में बदल गयी  ,
पति ने एकबार भी चुप नही कराया बोलना तो दूर सात्वना से हाथ भी न थामा मन ही मन सोचती आ गयी ससुराल।
सब ही बहुत खुश क्या जोरदार स्वागत हुआ सबने कहा रस्म  है पति पत्नी को गोद मे उठाकर ले जाता है  चलो तुम भी ले चलो।
हटो मुझसे नही होते यह बेकार के चोचले सुनते ही वह आहत हो गयी न ले जाते कहना जरूरी था क्या ।
सारे रस्में शुरू हो गयी अब आयी वो सुहानी सी रस्म जिसका इंतजार हर लड़की के ख्वाबों से हकीकत तक साथ रहती है कभी डराती कभी गुदगुदाती है उसे तो डरा ज्यादा रही थी पर क्या करती बैठ गयी  घूँघट डालके पता नही कब आँख लग गयी और सोने में तो कोई उसका मुकाबला कर ही नही सकता था।
पतिदेव कमरे में आ गए  चेन्ज भी कर लिए पर उसे कोई खबर नही आयुष झुंझला गया कैसी लड़कीं है घोड़े बेंचकर सो रही और लोग कहते हैं डर से नींद नही आती फिर खुद ही पलँग पर एक साइड बैठ गया थोड़ी से हलचल से वो उठी जोरदार अंगड़ाई ली और हाथ पतिदेव से टकरा गया फिर बोली अरे सुम्मी तू आज मेरे पास सोयी थी क्या सुम्मी उसकी चाची के बेटी थी जो अक्सर उसके पास सो जाती थी।
वो बिल्कुल भूल गयी कहाँ है जब नजर खुदपर दौड़ाई तो घबरा गयी और जब पास बैठे पिया को देखा तो  कयामत वरपा हो गयी उसपर बस  बुत सी बन गयी  ,
उसकी इस हरकत से आयुष भी बिना मुस्कुराए न रह सका बोल पड़ा अब आपका रूम घर और साथ रहने बाले बदल गए हैं मोहतरमा अपने हवास में रहिए ।
वो शरमा गयी ।
फिर एक बहुत प्यारा सा मंगलसूत्र उसने उसके गले में पहना दिया।
और बहुत प्यार से बात की सोनिया हैरान थी , यह वो ही हैं क्या  ,
खुद आयुष भी अपने बदले व्यवहार से हैरान था वो कैसे बदल गया।
दूसरे दिन उसे ऑफिस जाना था माँ ने मना भी किया पर जरूरी है माँ और शादी हो गयी तो क्या सारे काम काज छोड़ दूं ,
नयी दुल्हन है शाम से सुबह न हुई और तुझे काम की पड़ी है।
अरे माँ आप भी न दुल्हन कहीं भागी जा रही और मुझसे नही होगा पीछे पीछे घूमना ,
यह बात सोनिया ने सुनी तो पलकें भीग गयीं , 
आयुष ऑफिस चला गया दो चार जगह साइन किए यह क्या घर जाने को मन करने लगा  जो कभी न हुआ वो होने लगा वो मंत्रमुग्ध सा चेहरा पलकों के आगे आ खड़ा हुआ उसने जल्दी से बैग समेटा चल दिया  बाहर मैं जा रहा मैनेजर साहब ,
अरे आपको आज नही आना था काम तो जीवनभर का है साहब नयी नवेली दुल्हन क्या सोंचेगी ।
वह अनसुना कर गाड़ी की तरफ आ गया  अभी तो 1 ही बजा कभी नही गया इतनी जल्दी घर सब मजाक बनायेंगे पर सोचते सोचते कब घर आ गया पता ही न चला माँ ने दरवाजा खोला अरे अभी आ गए।
वो वो सिर दर्द कर रहा था।
मै तो पहले ही मना कर रही थी कि थका है पर कहाँ सुनता मेरी चल तू मैं चाय लाती तेरे लिए ।
वह रूम मे ठीक से पहुँचा भी नही दोनो भाई भाभी के साथ कैरम खेल रहे थे देखकर ऐसे रिएक्ट किए जैसे कोई नई बात हो गयी थी भाई भाई आप इतनी जल्दी आ गए।
वो शरमा गया तो क्या हुआ  चला जाऊं वापस ।
नहीं कहकर दोनों खिसक गए।
उसने एक नजर सजी सबरी सोनिया पर डाली तो करार मिला पर सोनिया ने उसे न देखा वो सुबह बाली बात को दिल से लगाए बैठी थी।
वो समझ गया बीबी खफा है पर क्यों शायद सुबह जो बोला सुन ली थी।
तुम्हें क्या हुआ क्यों मुँह फूला है मेरा आना अच्छा न लगा आपको।
नही आप ही बोले न मैं कहाँ भागी जा रही पहलीबार उसे एहसास हुआ वो भी कुछ भी बोल देता है कुछ कहने बाला ही था कि माँ आ गयी ।
अब कैसा है सिर दर्द  चाय का कप उसे पकड़ाकर बोली , ले बहु तू भी पी ले नहीं माँ अभी मन नहीं।
यह क्या तरीका है माँ से कहने का मन नहीं वो चाय बनाकर लायी और तुम यह कह रही हो ।
गलती हो गयी मुझसे कहकर डबडबाई आँखों से उसने कप थाम लिया।
माँ उसे डाँट कर बाहर चली गयी तो क्या हो गया न होगा मन।
तभी किसी का फोन आ गया वो बाहर आकर उससे बतियाने लगा, सोनिया का रोना तेज हो  गया रोने में उसे याद ही न रहा आयुष कब आ गया उसे रट देखकर वो घबरा गया क्या हुआ क्यों रो रही हो उसने उसका हाथ थामना चाहा वो दूर हट गई  ।
अरे इत्ता गुस्सा मैने क्या किया मैं तो मजाक किया था वो।
वह कुछ न बोली बस खामोशी से दीवार को निहारती रही।
वो भी खुदकी हरकत से शर्मिंदा  था तभी माँ ने आवाज लगाई आयुष नीचे आओ बहु के मायके बाले आ गए पगफेरे के लिए ।
वो तो भूल ही गया था  आज पगफेरे की रस्म है जल्दी से बाहर आ गया चाय नास्ता हुआ सोनिया की भाभी उसके पास आ गयी उन्हें देखते ही वो लिपटकर रो दी यह देख आयुष को बिल्कुल अच्छा न लगा भाभी क्या सोंचेगी।
बताओ कब आओगे आप लेने अपनी दुल्हन को।
जब मन करे इनका आने का बता देना ।
आपका मन नही करेगा ।
वो मुस्कुराकर दोनों को छोड़कर बाहर चली गयीं।
वह सोनिया के पास आकर बोला बताओ कब आऊँ तुम्हें लेने।
वह चुप रही।
मन नही आपका मेरे साथ रहने का बहुत बुरा हूँ मै कितना डाँट देता हूँ sorry यार क्या करूँ मैं ऐसा ही हूँ पर एक बात और अब तुम्हारे बिन रह नही पाऊंगा एक भी दिन प्लीज कुछ तो बोलो न मेरी बीबी देखो कान पकड़कर sorry ,
वह उससे लिपटकर जोर जोर रो दी उसने पहले दरवाजा बंद किया फिर बोला धीरे से रो यार सब आ जाएंगे फिर मै बोल दूँगा मुझे छोड़कर जाने का मन नही इसलिए रो रही है।
सुनकर वो खिलखिलाकर हँस पड़ी और आयुष ने उसे वाहों में भर लिया बोला कल तक सुनते थे शादी के बाद लोग बदल जाते हैं पर आज देख भी लिया। तुम्हारे मेरे जीवन में आगमन पर  मेरा  मन भी बहार से भर गया तेरी मनमोहिनी सूरत ने मेरे कुमलाए मन को बसन्ती मौसम में बदल दिया रे कैसा जादू है तेरे नयनों में सजनी।

         अंजू दीक्षित,
       बदायूँ,उत्तर प्रदेश।