बहुत कठिन होती है समय संग मन की चाल।
काल चक्र चलता रहा, धन ना पाया संभाल।

दौलत कमाने के चक्कर में सब सपने खो दिए।
कागजी टुकड़े के लालच में सब अपने खो दिए।

अहंकार में हो चूर, जमीर तक को मार दिया।
महल तो मिल गया, पर रिश्तों को हार दिया।

दो गज जमीन पर आखिरी दिन में डेरा मिलेगा।
इस दौलत पर अधिकार भी ना तब तेरा मिलेगा।


                  राजू लधरोइया