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पर जीना भी ठीक से 
ये एक कला है
 जन्म और मरण एक 
परिवर्तन है, 
इस अवश्यम्भावी परिवर्तन को गहन रूप से जिसने समझ लिया वही मृत्युंजय है,
 मरण ही नवीन जन्म में ले जाती है, 
उससे भय नही ,उसको अच्छे से जान लो,
 मान लो और पहचानलो
 हर पल ठीक से पूरा ही जियो अधूरा नही 
अधूरा नही पूरा जीवन ही अंतिम लक्ष्य मोक्ष को प्राप्त कराता है।
 उस आत्मिक सौंदर्य 
को आत्म निधि मानो 
और सत्य शिव और सुंदरता को प्राप्त कर अमर हो जाओ 
शिव सुख पाओ💐💐💐💐 




डॉ. सुरभि जैन "श्रुति"