भारतीय महिलाओं को प्रणाम🙏
#8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में अगली कड़ी में आज हम बात करेंगे एक ऐसी वीरांगना की जिसने जो किया वह किसी के लिए सोचना भी असंभव दिखता है।
रानी हांडीः

राजस्थान में एक कहावत हैः
“चुण्डावत मांगी सैनानी सिर काट दे 
दियो क्षत्राणी”

हाड़ी रानी जिसने युद्ध में जाते अपने पति को निशानी मांगने पर अपना सिर काट कर भिजवा दिया था।  यह रानी बूंदी के हाडा शासक की बेटी थी और उदयपुर (मेवाड़) के सलुम्बर ठिकाने के रावत लुणा जी चुण्डावत की रानी थी ।

जिनकी शादी का गठ्जोडा खुलने से पहले ही उसके पति रावत चुण्डावत को मेवाड़ के महाराणा राज सिंह (1653-1681) का औरंगजेब के खिलाफ मेवाड़ की रक्षार्थ युद्ध का फरमान मिला ।

नई-नई शादी होने और अपनी रूपवती पत्नी को छोड़ कर रावत चुण्डावत का तुंरत युद्ध में जाने का मन नही हो रहा था। यह बात रानी को पता लगते ही उसने तुंरत रावत जी को मेवाड़ की रक्षार्थ जाने व वीरता पूर्वक युद्ध करने का आग्रह किया ।

युद्ध में जाते रावत चुण्डावत पत्नी मोह नही त्याग पा रहे थे। सो युद्ध में जाते समय उन्होंने अपने सेवक को रानी के रणवास में भेज रानी की कोई निशानी लाने को कहा ।

सेवक के निशानी मांगने पर रानी ने यह सोच कर कि कहीं उसके पति पत्नीमोह में युद्ध से विमुख न हो जाए या वीरता नही प्रदर्शित कर पाए इसी आशंका के चलते इस वीर रानी ने अपना शीश काट कर ही निशानी के तौर पर भेज दिया ताकि उसका पति अब उसका मोह त्याग निर्भय होकर अपनी मातृभूमि के लिए युद्ध कर सके। 

और रावत चुण्डावत ने अपनी पत्नी का कटा शीश गले में लटका औरंगजेब की सेना के साथ भयंकर युद्ध किया।
अपने बंधन से मुक्त होकर उन्होंने अद्वतीय शौर्य दिखाया और वीरता पूर्वक लड़ते हुए अपनी मातृभूमि के लिए वीर गति हो गए और दूसरे राजपूतो के की भांति वो भी वीर गति को प्राप्त होकर एक अमर कहानी लिख गए।

से एक वीरांगना ने अपने पति को कर्तव्य विमुख होने से बचा लिया सोचिए कैसे कूट-कूट कर राष्ट्रभक्ति रानी  के ह्रदय में थी।
#अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं

वंदना शर्मा🙏