"तितली है,तू मुठ्ठी में बंद कर लूंगा।
आसमान को न देखना पर कतर दूंगा।"
कहने वाले मेरे प्यारे भईया ने ,... मेरी खुशी के लिए पूरे परिवार से लग गए।
हमारे घर में लड़कियों की घर के बाहर जाकर काम करने की इजाजत नहीं थी।बड़े भईया भी यही कहते थे,....जब मै बारहवीं पास कर ली।तो मेरे मन किया किया ली मै पत्रकारिता में स्नातक करू?और लोगो कि समस्या को मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुं चाऊ !
यह बात मैने मम्मी को बताई तो मम्मी मना कर दी।किसी तरीक़े से हिम्मत जुटाकर मैने खाने की मेज पर सबके सामने अपनी बात रख दीं
दादा जी मेरी बात को सुनकर गुस्से से लाल पीले हो गए?मम्मी को कहने लगें।
सुमन को घर का काम सिखाओ !बहुत जल्द उसके हाथ पीले करने है!मम्मी चुपचाप खड़ी सुनती रही जवाब में सिर्फ....जी बाबू जी बोली।
पापा की दादा जी के परम भक्त थे।या तू कहे दादा जी बात माने पत्थर की लकीर दादा जी जो कह दे वही सही है दिन तो दिन,रात तो रात... और बड़े भईया का भय इतनी थी।मेरे मन में कि मै उनसे कुछ कह ही नहीं थी।
सभी खाना खाए और अपने अपने कमरे में चले गय ! मम्मी किचन के काम में लग।
खाना खा तो ली थी।लेकिन खून जल रही थी मेरी,...जैसे किसी ने मुझे गर्म लावा की भट्टी में झोंक दिया हो।
कोई नहीं है अब मेरा दर्द बताने वाला सोचती हुई डायनिंग टेबल से उठी।और रोनी सूरत लेकर छत पे चली गई!
काफी देर तक वही छत के कोने में बैठी हुई रोती रही।रो रोकर आंख लाला हो चुकी थी। तभी मेरी नजर दरवाजे से सटे आदमी पर पड़ी।
उस इंसान को देखी तो मै बुरी तरह डर गई?वो कोई और नहीं मेरे बड़े भईया रोहित शर्मा है। मै अपने आसू पोछी और उठ गई !
भईया कुछ कदम चलकर मेरे बगल मे आकर खड़े हो गए!
मै डर के मारे सूखे पत्ते की तरह कांप रही थी।
मै उनसे मुंह फेर ली और रेलिग पर हाथ रखकर आसमान की और देखने लगी।
"छुटकी"तू पत्रकारिता में आगे बढ़ना चाहती है ! रोहित ने कहा,
हम्मम....! मै सिर झुकाई हुई कहा,
तुझे सच में मीडिया में जाना है!रोहित ने कहा,
हा, भईया कहकर रोती हुई मैने अपने मन की सारी बातें भईया को बता दी।
भईया मुझे गले लगा लिए और कहा,....इस आसमान को देख रही है! इसमें अभी हजारों तारे दिख रहे है लेकीन सबसे ज्यादा धुव्र तारा चमक रहा है!तुझे जीतना ऊंचा उड़ना है उड़ हर कदम ,हर घड़ी, मै तुम्हारे साथ हूं ?पूरा आसमान तुम्हारा है जहां मन हो वहां अपना नाम लिखो बिल्कुल उस धुव्र तारे की तरह जो चमकता है, टिमटिमाता नहीं !
भईया के प्यार भरे शब्द सुनकर मेरे आंख से आंसू बहने लगीं।
मेरे आंसू को देखकर......"अब क्यों रो रही है?" तेरे आंखों में आसू अच्छे नहीं लगते है! भईया ने आसू पूछते हुए कहा,
आपने कभी इतने प्यार से बात नहीं किए !मैंने कहा,
पहला"....कितनी भोली है तू छुटकी" तूझे डांटता हूं उसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि मुझे तुझसे प्यार नहीं है।मेरी छुटकी तेरे भईया टुझसे बहुत प्यार करते है।रोहित ने कहा,
मेरे आंख में आंसू देखकर भईया के आंख में भी आसू आ गय थे।एक दुसरे का आसू पीछे और हम दोनों हंसने लगे।
भईया पर दादा जी!दादा जी नहीं मानेंगे।मैने कहा,
मै हू ना ?तू बस अपने पंख फैलाकर उड़ने को तैयार रह !दादा जी को मै मना लूंगा ! भईया ने कहा,
अगले दिन भईया ने दादा जी को मेरी पढ़ाई के लिए मना लिए दादाद जी ने मुझसे खुद कहा कि मैं आगे पढ़ सकती हूं ?
मुझे कानपूर से दिल्ली छोड़ने भी आए सिर्फ मेरे बड़े भइया की वजह से,
हर महीने मेरे बड़े भईया दो से तीन न बार मेरे से मिलने भी आते थे। मेरी पढ़ाई पुरी होने के बाद जॉब के लिए भी मम्मी पापा और दादा जी को उन्हीं ने मनाया।
और आज मेरे बड़े भइया की वजह से ही मेरी एक पहचान है!
कृति शर्मा, क्राइम न्यूज़ रिपोर्टर
इसका श्रेय मै अपने बड़े भइया रोहित शर्मा को देती हूं ?उनकी वजह से आसमान में पंख फैलाकर उड़ पाई हूं?
लक्ष्मणी खरे 🖌️
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