माथे की लकीरें पढ़ी जाती हैं,
हाथ की रेखा भी भविष्य बताती है,
क्या सत्य है क्या झूठ है बड़ी ही दुविधा है,
कौन जान पाया है क्या जन्म से पहले था---
क्या जन्म के बाद है, क्या कोई अनुमान लगा पाया है,
क्या भूत था क्या भविष्य होगा---
केवल वर्तमान ही सत्य है,
बस जीवन में भटक न जाना---
सत्कर्म ही कर्तव्य है,
क्यों भविष्य की चिंता में आज को गवाएं---
जीवन का एक मूल मंत्र है---
स्वयं को खुश रखें और सभी पर खुशी लुटाए,
जीवन को रंगीन बनाएं सतरंगी संसार सजाएं
संगीता वर्मा✍✍

1 टिप्पणियाँ
हार्दिक बधाई अच्छी रचना के लिए💐👌