तुम्हारी यादें जो देती है मुझे जीने का हौसला।
कुछ करने का जूनून,.....
तुम्हारी यादों के समंदर में बहता मेरा सूकून
वक़्त बे वक़्त तुम्हारी यादों का पहरा
वो खूबसूरत एहसास,...
जो कराते है तुम्हारी मौज़ूदगी का आभास
मेरी रूह को महका जाती हैं वो हवाएँ
जो आती हैं छू कर तुम्हारे दर को
भाव बिह्वल सी हो जाती हूँ।
ग़ुलाबों की खुशबू सा घोल जाता है फिज़ाओ में
रोम रोम सुवासित कर जाता है।
और फ़िर छल जाता है मेरे मासूम मन को
जैसे तुम हो यही कहीं!!
जानते हो न,....
तभी तो बाँध रखी हूँ
रिश्तो की डोर से खुद को।
जो देते हैं मुझे जीने का संबल!!
तो सुनो अब तुम दूर मत जाना।
दूर मत जाना।
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मणि बेन

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