जीवन की खुशी , आत्मिक सुकून सब देने में है, 

आत्मिक आनंद परोपकार में है 

सत्य, समता, ऊर्जा, स्फूर्ति,यही तो निष्ठा है 

जीवन का दर्शन ,समर्पण में ही छिपा है,

लौकिक, पारलौकिक,अभ्युदय ,नवीनता के रस

 से अभिभूत यह आत्मिक सौंदर्य, विशेष है,अबलोकनीय है,

 प्रकृति की व्यवस्था का नियमन करती है सदा।

 इन आत्मिक गुणों को सदा आत्मसात कर आगे 
बढे, 
बढ़ते चले,इस मुश्किल सी राह पर,अविरल बढ़ते चलो यही श्रेयस्कर है

 श्रेय है प्रेय है अभिनव है,संसत्तुत्य है, 

समर्पण की दुनिया बहुत सुंदर है, एक गहरा समंदर है जो हर मानव के अंदर है।

 श्रुति,उस गहनता को पा लेना,जीवन सफल बना लेना। 


               डाॅ सुरभि जैंन "श्रुति"
                  सतना मध्यप्रदेश