⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘ ⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘⚘
सौतेले वाली चोट तो भगवान ने भी खाई थी,
राम जी को मिला वनवास भरत ने गद्दी पाई थी,
प्राण जाए पर वचन ना जाए यह कैसी रीत निभाई थी,
एकवचन के कारण अयोध्या नगरी डगमगाई थी,
सौतेली वाली चोट तो भगवान ने भी खाई थी,
कृष्ण विरह में राधा तड़पी राम विरह में सीता,
धरती पर जन्म लिया सबको यह प्रमाण दिया,
नियति से कोई बची नहीं आत्मा, मानव हो चाहे परमात्मा,
सब कर्मों का लेखा है किसने किसको देखा है,
सब कुछ यहां रह जाएगा, कर्मों का लेखा जाएगा,
किसी का हक छीन कर क्यों हर्षित हो जाते हैं,
शून्य मात्र मातृ हर्ष है यह, क्यों सुंदर जन्म गंवाते हैं,
क्या पाप है क्या पुण्य है किसने यह जाना है,
किसी का दिल ना दुखे, सर्वथा यही माना है,
सब भाग्य की खाते हैं, एक किस्मत सबने पाई है,
सौतेले वाली चोट तो भगवान ने भी खाई है,
हाथों की जीवन रेखा भी उसने ही बनाई है,
सौतेले वाली चोट तो भगवान ने भी खाई है।
संगीता वर्मा✍✍

3 टिप्पणियाँ