मेरे लिए ही नहीं हर किसी के लिए
पानी की हर बून्द वेशकीमती कीमती है।
गिरी जो आँखों से हो गया मन हल्का
वो भी जरूरी है।
गिरी जो प्यासे के मुंह में तृप्ति
पा गयी प्यास वो भी जरूरी है।
गिरी जो सूखती फसल में संजीवनी पा
गयी हर कली वो भी जरूरी है।
गिरी जो सजनी की भीगी जुल्फों से
साजन कोबहका गयी वो भी जरूरी है।
गिरी जो बनके गंगाजल आत्मा पा
गयी मुक्ति वो भी जरूरी है।
न कोई मोल इसका पर बहुत वेशकीमती
अनमोल है हर बून्द करके रखो संचित यह भी जरूरी है।
अंजू दीक्षित
बदायूँ, उत्तर प्रदेश।

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