भोर की किरण के साथ ही,नीरु ने आँखे खोली"
बाबा और भाई को सोता देख तसल्ली हुई"आज की सुबह कुछ हटकर थी"सूर्य की किरणें पर्दे से छनकर आ रही थी !
आज कई दिनो बाद नीरु अच्छी नीदं सोयी"शायद आज बाबा साथ सोये थे इसलिऐ,नीरु पंलग से उठने की कोशिश कर रही थी पर उससे  उठा न गया"
वो मखमली  बिस्तर उसे पहली बार मिला था" वो वापस फिर सो गई , """""""
नीरु ,बिटिया उठो ,चाय पी लो ,उसे हरिया दादा की आवाज सुनाई दी,नीरु ने आँखे खोलने की कोशिश की पर न खोल पायी""""""""
उसने अधमुदी आँखो से इधर उधर नजरें दौडाई,बाबा भाई
दोनो नजर न आऐ,वो चौक गयी,और आँख ,मसलने लगी,,
और एक झटके मे "नीरू पंलग से उतर कर दालान की ओर बढ गयी!"""
बाबा सामने से आते दिख गये नीरु ने सुकून की साॅस ली""
क्या हुआ बच्चे,,,बाबा मै डर गई थी "नीरु  गले लग कर बोली""""मेरा बहादुर बच्चा कैसे डर सकता है, बाबा हौले से उसके सिर पर हाथ फेरते हुऐ बोले"""""
चलो तैयार हो जाओ ,फटाफट """
बाबा हमको कही जाना है क्या,अब तक पीछे से निकल कर
सामने आता हुआ छोटू बोला""""""
हा बेटा ,,,,बुआ के घर ,दादा और दादी को लेने"""""
दादा ,दादी है हमारी वाऊ""" छोटू खुशी से झूम उठा""""
पर बाबा ,आपने पहले तो कभी बताया नही ,,,न ही मिलवाया"""नीरु ने अखिर पूछ ही लिया""""""
बेटा ये बडी लम्बी कहानी है,समय आने पर जरूर बताऊँगा:::
नीरु सकते मे आ गई,,,ये अखिर चल क्या रहा है""""
सारे रिश्ते थे मेरे पास ,और हम अनाथों सा जीवन जी रहे थे"""
अखिर हुआ क्या था""""""
बाबा की इतनी दौलत थी,जिसके वो अकेले वारिस थे,फिर वो माँ के इलाज के लिऐ दर दर क्यू भटक रहे थे"""""
अखिर क्या हुआ होगा ,किससे पूछे,नीरु उधेंडबुन मे खोई हुई थी ,की बाबा की आवाज से ,उसकी तन्द्रा टूटी"""
बेटा क्या सोच रही हो,चलो देर हो रही है"""""""जी बाबा"



        रीमा ठाकुर 

कृमशः"""""""आगे जारी भाग -१६
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