नीरु अपने रुम मे आ गई"और फटाफट कपडे निकालने लगी,,,,बेटा जल्दी करो """"""" जी बाबा"""""
गुलाबी सूट मे ,नीरू का गोरा रंग निखर गया था ,वो बहुत प्यारी लग रही थी ।।
अब तक हरिया ने छोटे को भी तैयार कर दिया था"""
वो आज बहुत खुश था"सबने बाहर के गेट की ओर कदम बढा दिऐ"""""""
बाहर चमचमाती कार देख ,नीरू और छोटे की आँखे फटी रह गई वो आँखे मसलते और खोल कर देखते,पर वो कार सच मे खडी थी,नीरू और छोटे को सब सपने जैसा प्रतीत हो रहा था।***
चले बाबा बोले"दोनो बच्चे ठिठक गये"और बाबा का मुहँ ताकने लगे"""
गाडी उनके समीप आकर खडी हो गई अन्दर से निकलकर
चालक ने सलाम ठोका"
गाडी की चाभी हमे दीजिऐ"चालक ने चाभी चन्द्रेश की ओर बढा दी--चलो बच्चों "चन्द्रेश चालक सीट पर बैठते हुऐ
बोला""पर बाबा आप ये गाडी चला लोगे,हाँ बेटा "
बाबा आपको कुछ हो गया तो इस बार छोटे खुद को न रोक पाया"""नही बच्चे बाबापर भरोसा रखो,आपके बाबा कही नही जाऐगे"
छोटे के गालो को हौले से थपथपाते हुऐ "चन्द्रेश बोला"""
मालिक ,,,,बच्चे सही बोल रहे है"आपको गाडी चलाये
बहुत समय हो गया"हारिया काका बोलै""""
आप निसचित रहै ,अब कोई गल्ती नही होगी"हम अब गल्ती सुधारने ही जा रहे है"काका"बस आप दुआ करना की सबकुछ ठीक हो जाऐ""""
ठिक है मालिक"""हरिया काका ने संक्षिप्त सा जबाब दिया"""
चलो मेरे शेर "और छोटे को अपने बगल सीट पर बैठा लिया
नीरू भी अब तक गाडी के अंदर आ चुकी थी!
और अब गाडी शहर छोड चुकी थी""""""कृमशः
आगे जारी"""भाग -17 रीमा महेन्द्र ठाकुर (लेखिका)
प्रिये पाठको आप समीक्षा मे जरूर बताऐ ये भाग कैसा
लगा आप सभी का आभार 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

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