पिछले भाग में आपने पढ़ा कि एक संपन्न परिवार की बेटी नंदिनी का विवाह नीरज से होता है और विदा होकर अपने साजन के घर ,अपनी नई दुनिया बसाने निकल पड़ी है।अब आगे.......

            मैरिज हाल से 20 मिनिट का रास्ता तय कर एक बड़ी हवेली के सामने कार रुकी।जहां सास ने गृह प्रवेश करवाया।अन्य रस्मों के बाद वह सब रिश्तेदारों से घिरी थी और नीरज रिलेक्स होने चले गए।थोड़ी देर बाद रूपा  उसे  आराम करने के लिये एक कमरे में ले गई और शाम को मुंहदिखाई के लिए तैयार रहने का बोलकर चली गई।सब अपने अपने कामों में व्यस्त थे ।उसने सुबह के बाद से नीरज को देखना तो दूर उसकी आवाज भी नही सुनी थी।उसे माँ पापा,गीतू दी,वन्दु और इलू की याद आ रही थी।थकान के कारण उसकी आंख लग गयी।
      शाम को फंक्शन की तैयारियों का शोर था।नीरज की कज़िन ने जब उसको तैयार किया तो आईने में खुद को देख शर्मा गई।कॉलोनी की सब महिलाएं आ चुकी थीं।सब उसकी सास से  उसकी सुंदरता की तारीफें कर रहे थे।पर उसकी आंखें तो नीरज को ही ढूंढ रही थी पर वो कही नजर नही आ रहा थे।वो रूपा से नीरज के बारे में जानना चाहती थी पर वो भी उसे शाम से नही मिली।
       समय बीता,सब मेहमान और रिश्तेदार विदा होने लगे।और वह घड़ी आई जब नंदिनी अपनी फूलों से सजी सुहाग सेज पर अपने प्रियतम का इंतजार कर रही थी।थोड़ा डर, थोड़ा संकोच और बहुत सारे सपनों के साथ।वो नीरज के बारे में ज्यादा नही जानती थी,समय भी कहाँ मिला।
       रात गहरी हो रही थी पर इंतजार खत्म ही नहीं हो रहा था।बेचैन मन से वो आज पूरे दिन के बारे में सोचने लगी।पूरा दिन किसी ने ज्यादा बात नही की शायद सभी इतने सारे मेहमानों का ध्यान रखने में व्यस्त थे। रात के एक बज गये,अब उसे अनजानी सी घबराहट होने लगी।तभी बाहर  कुछ गिरने की आवाज आई।वो उठकर धीरे से दरवाजे के पास आई,पर संकोचवश बाहर नही गई।पर कोई आहट नही मिलने पर उसने धीरे से दरवाजा खोल कर देखा तो सब जगह अँधेरा था,नीचे हॉल और गलियारे में छोटी लाइट जल रही थी।शायद सब सो गए थे,पर नीरज आप कहाँ  हो?यह सोचते हुए वो अपने कमरे में जाने के लिए पलटी तो उसे रूपा के खिलखिलाने की आवाज आई।और उसके साथ ही जो उसने सुना उसके बाद कदम अपने आप आवाज़ की दिशा में चले गए।
           
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     ✍️प्रीति ताम्रकार
           जबलपुर