ओरे मोहन मै तो तोरे
सावरे रंग में रंग गई...
तोसे कैसे कहूँ तुझ में
मैं बस गई...

हृदय कि रोम रोम में
बस अब तुम्हारा ही 
बसेरा है, मै तो न जाने
कब कि तेरी हो गई...

दिवानी है राधा तेरी,
राधा की दीवानी है 
ये दुनिया सारी, मै तो
खुद को तुम पर हार गई...

मनमोहन तेरी बंसी पुकारे
बस राधा का नाम, 
फिर क्यों मैं तेरी
दिवानी बन गई...
    
     आरती सुधाकर सिरसाट
     बुरहानपुर मध्यप्रदेश