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भारतीय सीमा पर तैनात मेरे सम्माननीय, वीर सैनिक भाइयों !
हार्दिक अभिवादन 👏👏

मैं यहां पर कुशल पूर्वक हूँ और आप लोगों की कुशलता तथा अच्छे स्वास्थ्य के लिए ईश्वर से कामना किया करती हूं ....

मेरे परम प्रिय भाइयों ! 
आज मेरी तीव्र इच्छा हुई कि मैं आप लोगों को पत्र के माध्यम से अपने मन के भावों को व्यक्त करूँ .......

यद्यपि मैं आप लोगों को व्यक्तिगत        रुप से बहुत कम जानती हूं लेकिन आप लोगों के त्याग और बलिदान की कहानियां सुन सुनकर आप लोगों के बारे में बहुत कुछ जान गई हूं ....... 

आप हमारे देश की सीमाओं के सजग प्रहरी हैं ।...  आपकी  अद्भुत सतर्कता और साहस की वजह से ही  हम यहां निश्चिंता के साथ जीते हैं और अपने कार्यों को सुचारु रुप से कर पाते हैं तथा रात में चैन की नींद सोते हैं ।

आपलोग हमारे देश के बहुमूल्य रत्न हैं ...... उस नींव के पत्थर के समान है जो दिखाई तो नहीं देते लेकिन परोक्ष रूप से देश की प्रगति में आप महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

  जब देश में विकट परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं ,शत्रु देश अपना गाल बजाते हैं तब सबसे पहले हमें आपकी याद आती है ।

मैंने कश्मीर में आप लोगों को  बर्फीली पहाड़ियों पर पहरा देते हुए अपनी आंखों से देखा तो मैं आप लोगों के प्रति अपार श्रद्धा से नतमस्तक हो गई।   यही क्या देश के हर  भागों... .जल, थल और अनल मेंं  सभी जगह देश के जुझारू प्रहरी के रूप में तैनात रहते हैं। चाहे  पूस की बर्फीली रात हो , जेठ की तपती दोपहरी या फिर भादो की मूसलाधार बारिश हो आपको मौसम और तापमान या जगह से कोई फर्क नहीं पड़ता है । आपका लक्ष्य तो अर्जुन की तीर की भांति  दुश्मन की कुत्सित चालों पर रहता है  कि किस तरह से उन पर विजय पाया  जाए।
आपलोग बिना किसी स्वार्थ के  मां भारती की सीमाओं की रक्षा करते हैं और शत्रु अगर आंख दिखाता है तो आप उसकी आंखों को फोड़ने की भी क्षमता रखते हैं।
कई बार धोखे से शत्रु आप की सीमा में घुस आता है और आप लोगों को हानि पहुंचाता है।  जिसे सुनकर हमें अपार कष्ट होता है और जी चाहता है कि  उनका समूल विनाश हो जाए ।   

पाकिस्तान और भारत का युद्ध आज भी किसी को भूला नहीं है । कारगिल युद्ध में भी आपने दुश्मनों को धूल चटा दी थी। पुलवामा में भी आपने दुश्मनों से बदला लेकर ही दम लिया । आजकल चीन भी कभी कभी आंखें तरेरने की कोशिश करता है लेकिन आप लोग चुटकियों में  उसे उसकी औकात दिखा देते हैं । शत्रु देशों की गीदड़ भभकियों का आप लोगों के ऊपर कोई असर नहीं पड़ता है।

आप युद्ध में दुश्मनों को पराजित करके जब विजय पर्व मनाते हैं तब हमारे सीने आप लोगों के प्रति गर्व से चौड़े हो जाते हैं लेकिन यदि हमारा कोई सैनिक भाई शहीद  हो जाता है  !!!उनको जब तिरंगे में लपेटकर लाया जाता है , उस समय उनके मुख मंडल की आभा और तिरंगे मेंं लिपटे शरीर का अलौकिक तेज देखते बनता है । सभी लोग टेलीविजन पर  अंतिम यात्रा को टकटकी लगाकर संतप्त हृदय  से देखते हैं और उनकी गौरव गाथा का वर्णन करते हैं।😌😌
ऐसी विदाई सभी को नहीं मिलती है।

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आपकी तपस्या उन तपस्वियों से कहीं हजार गुना बड़ी है जो हिमालय की कंदराओंं में बैठकर हजारों वर्ष तपस्या करते हैं।  आप लोग अपनी मातृभूमि के लिए और देश के  लोगों की सुरक्षा के लिए तपस्या करते हैं। मां भारती और तिरंगे की आन, बान ,शान के लिए तपस्या करते हैं। जो उनकी वर्षों की तपस्या से कहीं बढ़कर है ।
अनुशासन और समय की पाबंदी की शिक्षा अगर किसी को लेनी हो तो कोई आपसे सीख सकता है । हर काम समय पर करना आप लोगों की प्राथमिकता होती है।
आपलोग अपने बच्चों की किलकारियां , मां की ममता और बहन से मीठी तकरार के लिए तरसते  होंगें । लेकिन आप लोग अपने मन के भावों को पत्र के माध्यम से ही एक दूसरे को बता पाते हैं । कर्तव्य  निर्वहन के कारण अपने घर के कई समारोहों मेंं भी आपलोग नहीं आ पाते हैं । आपकी छुट्टी के लिए सरकार को कुछ लचीले नियम बनाने चाहिए। कई बार आप लोगों के द्वारा लिखित पत्रों को भी पढ़ने का मौका मिलता है जिन्हें पढ़कर हृदय में भावनाओं का अनोखा ज्वार उठता है और आपके प्रति दिल श्रद्धा से भर जाता है। सभी मां बाप  के भाग्य में ऐसे रणबांकुरे पुत्र नहीं होते।
आप लोगों की अद्भुत जांबाजी और अदम्य उत्साह की बदौलत अपना देश पूरी दुनिया में गौरवान्वित होता है।

पत्र लिखते समय मुझे आप लोगों की तस्वीर  आंखों के समक्ष एकदम साक्षात दिखाई दे रही है कि किस तरह से आप लोग अपने कर्म के प्रति दृढ़ और सजग हैं। मैं आप लोगों के देशभक्ति के जज्बे को सलाम करती हूँ....।

मुझे बहुत अच्छा लिखना तो नहीं आता , कुछ कोशिश  किया है आप लोगों की भावनाओं को  उकेरने की.........।

कभी नहीं चाहा ...अखबारों में मेरा नाम छपे।
कभी नहीं चाहा ....सोशल मीडिया में छा जाऊं।
कभी नहीं चाहा....लोग मेरी प्रशंसा करें। 
कभी नहीं चाहा ....सैनिक होने का कोई अनुचित लाभ मिले।

सैनिक की चाह........

अभी रक्त का तिलक करो!
आरती उतारो प्यारी बहनों ! 
राखी से अब रण कौशल दो !
मन मेंं उत्साह लबालब भर दो!
ओ प्राणप्रिया ! मेरे सर से, 
अब अपना आंचल सरका लो !
इस लाल चुनरिया से दो गज का।
कफन मुझे दो, विदा करो!
हम सब सैनिक करते आह्वान!
रखेंगे अक्ष्क्षुण देश की शान ।
मां भारती की चरणों में कर देंगे,
अपना सर्वस्व बलिदान।☺️🙏

आपलोगों को एक बार पुनः श्रद्धावनत प्रणाम और यथोचित प्यार और सम्मान......

आपकी भारतीय बहन
     स्नेह लता पाण्डेय
              नई दिल्ली