१. अनुग्रहित
    कृत कृत है तेरी
    पुत्री तुम्हारी
२. बागबान से
    शीत ताप सह के
    पाला श्रम से
३.ओ जन्मदाता
   प्रेम की पराकाष्ठा
   वात्सल्य मूर्ति
४.  ज्ञान प्रदाता
     थे महिमा मंडित
      गरिमामय
५. क्षमा करो हे
    नहीं समझ पायी
      मौन प्रेम को
६. तू ज़मीं मेरी
    तू आसमान मेरा
    तू हम साया
७. खोने से जाने
    मां- बाप मेरी छांव
    थी मेरी ढाल
८.कैसे चुकाना
   वो ममता का मोल
    जीवन- ऋण
९. सिसकते है
    तन मन व प्राण 
     मां - बाप बिना 
१०. दिव्यात्मा थे वो
    जला गये जग में
     प्रेम के दीप
११.धन्य हूं प्रभु
     दे दिये  है मां बाप
      देवता- तुल्य
१२.  चल पाऊं मैं
       पगडंडी पे तेरी
      अनुगामी हो
 १३.श्रद्धांजलि तो
     काव्यांजलि से देती
      ओ पिता मेरे
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मीनाक्षी एस.एस.मीरा
रोहिड़ा (पिंडवाड़ा)
माउन्ट आबू, राजस्थान