चलो तैयार हो जाओ
चले सैर पर,जूते पहन कर
रास्तों की सैर कर।
मेरे जज्बातों को हवा सी मिल जाए
चलो सैर पर चले तो जिंदगी खिल जाए।
बियाबान से लगते है शहरों के जंगल
पहाड़ों पर चले तो सुकून मिल जाए।
मिलता कहां है सुर्ख नीला आसमान
इतने सुंदर आसमां को देखकर यकीन हो जाए।
मेरे अरमानों की है छोटी सी गुजारिश
कहां से शुरू हो और कहां थम जाए
पूजा करे कोई इस दिल की फिर कोई
क्या करे जब खुदा खुद मिल जाए।
चलो चले कितनी बातें है बाकि
गर रही जवानी तो फिर कोई मिल जाए।
हरप्रीत कौर

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