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मुझसे पूछ तो लेते क्या मेरे दिल में आई थी,
मैं थोड़ी शर्मीली थी थोड़ी सी सकूचाई थी,
जात पात का बंधन लेकर थोड़ी सी घबराई थी,
दिल के मन मंदिर में तेरी मूरत की परछाई थी,
आंखों से बातें करती थी लव से कुछ नहीं कह पाई थी, तुम मुझसे पूछ तो लेते क्या मेरे मन में समाई थी,प्रेम के पर जब दे दिए थे क्यों उड़ने पर रोक लगाई थी,दिल परिंदा हो गया था सपनों में यह खो गया था,
 नजर भर को देखने की अभिलाषा मन में समाई थी, तुम मुझसे पूछ तो लेते क्या मेरे दिल में आई थी,

           संगीता वर्मा✍✍