पानी रे पानी 
तू अमृत जल
सा पानी... 
नानी कहती है
हमसे,न बहाओ
बेकार ये पानी.. 
समाप्त हुआ तो
खत्म हो जाएगी
ये जिंदगानी... 
ये अमृत सा है
पानी.... 
बंजर सी हो जाएगी
ये जमीन... 
न उगेगी फसलें यहाँ
हो जाएगी विरानी
हो जाएगी धरती 
सूनी... 
हर रस सुख का है
पानी... 
दार्दुर भी टर्राए
मोर  मेघ बुलाए
मेघ घिर घिर 
आए.... 
बिजुरी चमकी जाए
बरखा साथ ले आए
छम छम पानी को
बरसाए..... 
गगन समुद्र ले आए
धरती को पानी दे
जाए..... 
     🌹 मनु✍🏻