चल आज कुछ नया करते हैं,
रंगों से जीवन में नया उल्लास भरते हैं।
आरेख बनाते हैं धूमिल रंगों से,
उसमें चटख रंगों की परत चढ़ाते हैं।
बेमेल रंगों को जरा प्यार से मिलाते हैं,
फीके पड़ते रिश्तों को करीब हम लाते हैं।
जो प्रेम भावनाओं को तरस रहे थे,
चल उस प्रेम पर भावनाओं के रंग भरते हैं।
कुछ अधूरी कहानियों को अधूरे किस्सों से,
उन किस्सों को जीवन के जरूरी हिस्सों से मिलाते हैं।
अपूर्णता से पूर्णता की ओर नई रंगोली हम बनाते हैं,
चल आज से ही नई शुरुआत कर जीवन संवारते हैं।
श्रुति झा

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