सृष्टि खाली सड़क पर चालीस की स्पीड से अपनी नई गाड़ी में मजे से चली जा रही है । उसे ड्राइविंग करना बहुत पसंद
है । आस पास का नजारा देखते हुए, और गाना गुनगुनाते हुए
वह मस्ती में चली जा रही है ।
उसके पापा हर्षवर्धन मौर्य को पसंद नहीं की सृष्टि गाड़ी चलाए । उन्हें लगता है, सृष्टि अभी छोटी है, उसे चोट लग सकती है । पर जब से सृष्टि ने अपना बीसवां जन्मदिन मनाया है, तब से वह पापा को एक ही बात कहकर मना लेती है - "पापा, अब मैं बड़ी हो गई हूं ।"
सृष्टि बेहद खूबसूरत, अमीर और व्यवहार की बहुत ही अच्छी लड़की है । हंसती मुस्कुराती और जहां तक हो सके सबकी मदद करती । इतना पैसा, रूप होने के बावजूद भी वह घमंडी नहीं है । वह एकदम निश्चल और सरल है उसे समझना बहुत ही आसान है ।
सृष्टि ने गाड़ी की गति धीमी करने के लिए ब्रेक पर पैर रखा पर गाड़ी की स्पीड में कोई कमी नहीं आई । वह हैरान रह गई और बार बार ब्रेक पर पैर मारती रही । गाड़ी की रफ्तार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा । सृष्टि घबरा गई, घबराहट में वह गाड़ी का स्टीयरिंग भी ठीक से संभाल नहीं पा रही थी, जिसकी वजह से गाड़ी लहराने लगी ।
सृष्टि जोर से चिल्लाई, उसकी गाड़ी एक पेड़ से टकराकर रुक गई । गाड़ी के सेफ्टी बैग्स खुल गए थे । सृष्टि उन में फंसी अपने आप को देख रही थी । तभी उसने कोई आवाज सुनी ।
जैसे तैसे वह गाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी तो दो हाथों ने उसकी मदद की । वह गाड़ी से बाहर आई ।
उसके सामने पच्चीस - छब्बीस साल का एक खूबसूरत लड़का खड़ा हुआ उसे डांट रहा था ।
"तुम, अमीर बाप की बिगड़ी हुई औलाद, जब गाड़ी चलानी आती नहीं है तो चलाती क्यों हो ? या फिर पी रखी है ?
बाप के पैसों का लिहाज नहीं तो अपनी जान की परवाह तो करो, अरे अपनी जान की परवाह नहीं तो कम से कम दूसरे की जान की तो परवाह करो ।"
सृष्टि को बहुत गुस्सा आया । एक तो उसकी नई गाड़ी का इतना बड़ा नुकसान हो गया उस पर यह महाशय बिना कुछ जाने भाषण दिए जा रहा है । सृष्टि से जब और सहन नहीं हुआ तो वह उस पर भड़की ।
सृष्टि : ए मिस्टर, शट युअर माउथ । बिना कुछ जाने, बोलते ही जा रहे हो । यह तो नहीं कि पूछें, कहीं चोट तो नहीं लगी ?
बल्कि बाप तक पहुंचे जा रहे हो । कुछ तमीज भी है कि नहीं, कि लड़की से कैसे बात की जाती है ? देखने में तो ठीक-ठाक हो, पर मैनर्स नाम की चीज नहीं है तुम्हारे पास ।
वह थोड़ी शांत हुई, फिर आगे कहा -
वैसे तो मुझे आप को थैंक यू कहना चाहिए, जो आप मेरी मदद के लिए आए । पर आपका व्यवहार ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि मैं थैंक्यू बोलूं ।
वह लड़का अब चुपचाप सृष्टि की बातें सुनता रहा । जब से सृष्टि ने बोलना शुरू किया वह बस उसे निहारे ही जा रहा था ।
सृष्टि : अब ऐसे कैसे देखे जा रहे हो, सांप सूंघ गया क्या ?
लड़के को जैसे होश आया, वह जल्दी से बोला -
"माफ करना, मैं कुछ ज्यादा ही गरम हो गया । दरअसल, आपकी गाड़ी लहराती हुई चल रही थी । मुझे लगा आपने पी रखी है । बाय द वे, मेरा नाम आकाश है । आपको कहीं चोट तो नहीं आई ।"
सृष्टि : नहीं, चोट मुझे तो नहीं लगी पर मेरी गाड़ी को बहुत चोट आई है । लगता है इसका ब्रेक खराब हो गया । मैंने बहुत ब्रेक लगाने की कोशिश की पर गाड़ी रुक ही नहीं रही थी ।
आकाश : ओ हो, आइयम सॉरी, मैंने बेवजह आपको इतना कुछ सुना दिया । गाड़ी का तो कुछ नहीं कर सकता पर आपको लिफ्ट दे सकता हूं । कहां जाना है आपको ?
सृष्टि : शालीमार बाग, रुको मैं पहले पापा को फोन कर लूं ।
सृष्टि फोन पर पापा से बात करने के बाद आकाश की गाड़ी में बैठ गई । सृष्टि थोड़ी उदास थी । आकाश ने गाड़ी स्टार्ट की ।
आकाश : क्या हुआ ? एनी प्रॉब्लम ।
सृष्टि। : नहीं, कुछ नहीं, बस पापा ने थोड़ा सा डांट दिया,
मैं जिद करके अकेले गाड़ी से आई थी न । वो मेरी बहुत चिंता करते हैं ।
आकाश : आपने गाड़ी का भी तो नुकसान कर दिया ।
सृष्टि। : नहीं, गाड़ी की कोई चिंता नहीं । उनके लिए तो मैं सेफ हूं, ये ही सबसे बड़ी बात है ।
सृष्टि ने आकाश को अपना नाम बताया । बातें करते - करते
कब सफर पूरा हो गया, पता ही नहीं चला । सृष्टि के बंगले के आगे आकाश ने गाड़ी रोकी ।
सृष्टि : आकाश, तुम मुझे अमीर बाप की बिगड़ी औलाद क्यों कह रहे थे, अमीर तो तुम भी हो ।
आकाश ने सृष्टि की आंखों में झांकते हुए कहा -
आकाश : अमीर तो हूं, पर तुम्हारे जितना नहीं ।
सृष्टि। : क्या मतलब ?
आकाश ने बात बदलते हुए कहा -
आकाश : कहां तुम्हारा बंगला, कहां हमारा घर । हम तो तुम्हारे आगे कहीं नहीं ठहरते । चलो ठीक है, अब मैं चलता
हूं ।
सृष्टि : थैंक्स फॉर एवरीथिंग । फिर कब मिलोगे ?
आकाश। : जब अगली बार तुम्हारी गाड़ी के ब्रेक फेल होंगे,
तब ।
यह कहकर आकाश हंसने लगा । सृष्टि भी हंसने लगी ।
सृष्टि : वेरी फनी।
दोनों ने एक दूसरे से विदा ली ।
क्रमशः
धनु दयाल

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