सपनों से भरे नैना
कुछ जागती आंखों के
कुछ सोती आंखों के
तेरी आंखों के कुछ मेरी आंखों के
सपना पूरा करने में भागदौड़ धूप कर
सपने सच करने को मेहनत की खाद
कर्म का व्यौहार करें
तेरी आंखों की कुछ
मेरी आंखों के सपने सच करें
अपने सपने सच करने को थोड़ा उड़ान भरी
कुछ सच हुए, कुछ रह गए अधूरे
इस आभामंडल में
सपने दब गये, जिम्मेदारी के बोझ तले
मैंने फिर नये सपनों को उड़ान दी
बच्चों और घर के सपने हो गए सर्वोपरि
सपनों को खुले नैनो से पूरा करने लगी
मेहनत और कर्म की खाद से उन्हें सींचने लगी
सपने तो सपने आखिर कब ये अपने हे।।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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