तन्हाई ही बदी थी,
तो फिर कोई दस्तक कैसी?
उसने आना नहीं हमने जाना नहीं,
तो फिर ये बेकरारी कैसी?
खुदा जब खुद में ही है,
तो फिर ये इबादत कैसी?
हम सब एक ही हैं ,
तो फिर ये अदावत कैसी?
ताउम्र अकेले गुजर गई,
तो जनाजे में ये भीड़ कैसी?
मिट्टी से आया,मिट्टी में मिलना,
तो फिर ये मैं मैं कैसी?
ललिता विम्मी
भिवानी(हरियाणा)

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