नन्ही सी आँगन मे मेरे"
आती एक प्यारी गौरैया"
हरदिन फुदक फुदक कर"
रौनक लाती है,गौरैया"
कुछ दाने प्रेम विवश मे"
मै,उनको ,अर्पण कर देती"
मेरे इस मनुहार भरे पल"
खुद,जीने आ जाती गौरैया"
कुछ दानो को"चोंच मे भरकर"
छत पर झट से उड  जाती है"
नन्हें,बच्चे"राह ताकते"
उन्है ,खिला आती गौरैया"
मिट्टी के पात्र मे,मै "
जब निर्मल जल भर देती हूँ"
बूँद बूँद भर प्यास बूझाने"
झट, से  आ जाती ,गौरैया"
हो जाऐ न ,विलुप्त कही ये"
घर की रौनक न खो जाऐ"
जब हम सब मनुहार करे"
झट से आ जाये गौरैया"
हम सब मिलजुल कर चलो"
बेजुबान का संसार बसाये"
प्रकृति से ,खिलवाड करे न"
ताकि,बच जाये गौरैया ताकि 
बच जाऐ ,गौरैया🙏🏼🙏🏼🙏🏼



रीमा महेन्द्र ठाकुर
रानापुर -मध्य प्रदेश-भारत