मां मुझे आने से पहले क्यो रोक दिया।
दुनिया वालो का कहना क्यो मान लिया।
मानकर इनका कहना तू सब कुछ भूल गई।
और बेटे की चाहत में तू भी बहक गई।
सोचा था मैंने, जन्म लेकर कुछ ऐसा काम करूंगी,
तुझ पर होने वाले अत्याचारों के नाश करूंगी।
जो बेटा न कर सका, वो मैं कर दूंगी।
छोड़ कर जमी आसमान छू लूँगी।
मैं इंदिरा वसुंधरा किरण या कल्पना
कोई भी रूप लेकर आती
बेटी तो धन है पराया
अमानत समझ कर ही पाल लेती।
पर माँ, तूने मेरे सपनों को तोड़ डाला।
और दुनियां देखने से पहले ही मुझे मार डाला
नारी होकर नारी का अपमान किया।
सस्ता जानकर सौदा बहुत महंगा किया।
जब बेटा तेरी नही सुनेगा कोई फरियाद
तब माँ तुझे, मेरी बहुत आएगी याद।
श्यामा सोलंकी

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