वो सांवली सी लड़की आज भी मुझे याद है।
होठों पर हल्की सी मुस्कान लिए
माथे पर बिंदी उसकी सुंदरता पर
चार चांद लगाए हुए आज भी मुझे याद है।
उसकी चूड़ियों की खनक,कुछ पैगाम
देती हुई आज भी मुझे याद है।
उसकी झील सी गहरी आंखें प्यार का इजहार करती हुई आज भी मुझे याद है।
है सांवली सी पर बेहद खूबसूरत
वो सांवली सी लड़की आज भी मुझे याद है।
गुलमोहर सी हंसती मेरी रूह में बसती
वो सांवली सी लड़की।
वो सांवली सी लड़की पहले मेरे ख्यालो में थी,अब सवालों में हैं और आज भी मेरी यादों में बसी है वो सांवली सी लड़की।
हरप्रीत कौर

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