भोर के होते ही घर से निकल जाओ

थोड़ा टहलो,और ताजी हवा सांसों में भर लो।

सुबह की ताजी हवा यही है

हमारे रोगों की दवा।

उगते हुए सूरज की रंगोली को देखो

ये उड़ते हुए पंछियों की टोली को देखो

ये भोर का नजारा थोड़ी देर का है

मुफ्त में मजा ले लो इस खेल का

जिंदगी में सेहत है सबसे बड़ी

सेहत से बड़ी न दौलत कोई

न जाने कौन सी मुसीबत है खड़ी

पेड़ों की उमंग देखी आज सुबह

आई है मुस्कुराती हुई फिर

आज की सुबह। 


  
             हरप्रीत कौर