सांवरा मन को भा गयो रे
मुरली की तान सुना गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
पीत पट पीतांबर पहने
पगड़ी शीश लगा गयो रे
मोर मुकुटवाको भा गयो रे
तिरछे नैन मधुर मुस्कान
दिल को भा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
माखन मिश्री उसे बोते भावे
मटकी फोड़ माखन खा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
लीला उसी की अद्भुत न्यारी
ग्वालन संग रास रचा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो
रे सांवरा मन को भा गयो रे
सखियों संग करे वह बरजोरी
चूड़ीवाला बन के आ गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
मुरली मधुर बजा गयो
गिरी को उंगली उठा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
राधा राधा कुंजन में पुकारे
राधा संग नैन लड़ा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
उस बांके की लीला निराली
वृंदावन छोड़
मथुरा आ गयो रे
कंस को मार जगत हर्षा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
कान्हा संग प्रीत लगाके
भरी सभा बीच
द्रोपदी की लाज बचा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
सांवरे की लीला निराली
अर्जुन को गीता ज्ञान सुना गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे
जीने का ढंग सीखा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे्
सांवरे चरनन में," मधु "बलिहारी
मुक्ति का मार्ग बताएं गयो
रे सांवरा मन को भा गयो रे
सांवरा मन को भा गयो रे।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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